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विस्तृत उत्तर
तपोलोक में प्रकाश सूर्य, चंद्रमा या नक्षत्रों से नहीं होता। वहाँ रहने वाले तपस्वियों और वैराज देवगणों के आत्म-तेज तथा उनकी तपस्या की ऊर्जा से संपूर्ण लोक देदीप्यमान रहता है। दस्तावेज़ में स्पष्ट कहा गया है कि वहाँ का प्रकाश आँखों को चुंधियाने वाला भौतिक प्रकाश नहीं है, बल्कि आत्मा को शीतलता और ज्ञान प्रदान करने वाला दिव्य प्रकाश है। यह लोक अज्ञानता के किसी भी अंधकार से मुक्त है।
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