विस्तृत उत्तर
मृत्यु के 13वें दिन (तेरहवीं/त्रयोदशाह) = पितर विदाई और सामूहिक भोज का दिन।
ब्राह्मण भोजन नियम
- 1ब्राह्मण भोजन = श्राद्ध का अनिवार्य अंग। ब्राह्मण = पितरों का प्रतिनिधि।
- 2कम से कम 1 ब्राह्मण भोजन कराना अनिवार्य। उत्तम = विषम संख्या (1, 3, 5, 7, 11, 13)।
- 3भोजन सात्विक — खीर, पूड़ी, सब्जी, दाल-चावल। मांस/प्याज/लहसुन वर्जित।
- 4लोहे के बर्तन में न परोसें — कांसा/पीतल/पत्तल उत्तम।
- 5भोजन से पहले पंचबलि (गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी, अग्नि) निकालें।
- 6ब्राह्मण को दक्षिणा (धन + वस्त्र + अनाज) अवश्य दें।
- 7प्रसन्न मन से भोजन कराएँ — दुखी/अप्रसन्न भाव से न करें।
तेरहवीं विशेष
- ▸सामूहिक भोज (मृत्युभोज) = परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी।
- ▸मृतक के कपड़े/वस्तुएँ दान करें।
- ▸गरुड़ पुराण पाठ समाप्ति + शांतिकर्म।





