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विस्तृत उत्तर
तृतीया श्राद्ध का मुख्य संदेश यह है कि श्रद्धा, शुद्ध द्रव्य, कुतुप मुहूर्त, तर्पण, पिण्डदान, पंचबलि और ब्राह्मण भोज से पितरों को तृप्त कर पितृ ऋण से उऋण हुआ जा सकता है। यह पितरों की शांति, वंश की समृद्धि और लौकिक-पारलौकिक कल्याण का मार्ग है।
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