विस्तृत उत्तर
कौषीतकि ब्राह्मण उपनिषद के प्रथम अध्याय में विजरा नदी का वर्णन मिलता है। विजरा का शाब्दिक अर्थ है 'जहाँ कोई बुढ़ापा या क्षय न हो'। यह सत्यलोक की सबसे प्रमुख भौगोलिक और आध्यात्मिक सीमा है। सत्यलोक में प्रवेश करने पर जीव को पहले अर सरोवर पार करना पड़ता है जिसे पार करते ही उसके भीतर के सभी सांसारिक द्वंद्व समाप्त हो जाते हैं। इसके पश्चात येष्टिह नामक क्षण आते हैं जो ज्ञानी जीव को देखते ही दूर भाग जाते हैं। तत्पश्चात जीव विजरा नदी के समक्ष पहुँचता है। यह नदी सत्यलोक की प्रवेश सीमा है जिसे पार करने से जीव अपने सभी कर्म-बंधनों से मुक्त हो जाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक


