विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के छठे अध्याय में महर्षि पराशर मैत्रेय जी को यमराज के शासनाधीन नरकों का विवरण देते हैं। इन नरकों की सूची भागवत पुराण से कुछ भिन्न है, जो शास्त्रों की काल-भेद या कल्प-भेद से जुड़ी सूक्ष्म विवेचना को प्रमाणित करती है। विष्णु पुराण में रौरव, रोध, सूकर, ताल, तप्तकुण्ड, तप्तलोह, महाज्वाल, लवण, विलोहित, कृमिभक्ष या कृमीश, लालाभक्ष, विशसन या वेधक, अधोमुख और पूयवह आदि नरकों का उल्लेख है। इन नरकों में झूठी गवाही, भ्रूण हत्या, गोहत्या, मदिरापान, ब्रह्महत्या, स्वर्ण चोरी, गुरु-पत्नी गमन, वेद निंदा, देव-पितृ-द्वेष, अतिथि का अनादर और अपवित्र कर्मों के लिए दंड बताया गया है।
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