विस्तृत उत्तर
वितल लोक का वातावरण अत्यंत सुखद, विलासी और मायावी सौंदर्य से परिपूर्ण है। यह पृथ्वी के नीचे स्थित है, पर अंधकारमय नहीं है। यहाँ सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश सीधे नहीं पहुँचता, पर महान नागों के फनों पर स्थित दिव्य मणियों की रश्मियों से पूरा लोक जगमगाता रहता है। दिन और रात का भेद नहीं होता, इसलिए निवासियों को समय के बीतने का भय नहीं होता। सूर्य की सूक्ष्म किरणें केवल प्रकाश देती हैं, गर्मी का संताप नहीं; चंद्रमा की किरणें सुखद चांदनी देती हैं, ठिठुरन नहीं। यहाँ सुंदर वन, नदियाँ, रमणीय सरोवर और कमलों से भरे जलाशय हैं, जहाँ कोयल और अन्य पक्षियों की मधुर ध्वनि गूंजती रहती है। वायु सुगंधित और अनुकूल है। बुढ़ापा, रोग, पसीना, दुर्गंध या शारीरिक क्षय का कोई स्थान नहीं है।
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