विस्तृत उत्तर
वृश्चिक = मंगल स्वामी (द्वितीय)। विशेष: वृश्चिक+मंगल = तीव्र ऊर्जा; दोष हो तो प्रभाव अधिक। निवारण (Q887): हनुमान चालीसा (प्रतिदिन), 'ॐ अं अंगारकाय नमः' 108, सुंदरकांड मंगलवार, मूंगा, 3 मुखी, कुंभ विवाह। विशेष वृश्चिक: महामृत्युंजय मंत्र (वृश्चिक=8वां भाव=मृत्यु/परिवर्तन); शिव पूजा।




