विस्तृत उत्तर
यमलोक में चित्रगुप्त का न्याय अंतिम इसलिए माना जाता है क्योंकि उनका लेखा-जोखा स्वयं में अंतिम और अकाट्य साक्ष्य होता है। वे अग्रसंधानी पुस्तिका में हर जीव के जन्म से मृत्यु तक के शुभ-अशुभ कर्मों का सूक्ष्म लेख रखते हैं। जब जीवात्मा यमराज के सामने प्रस्तुत होती है, तब चित्रगुप्त उसका संपूर्ण कर्म-वृत्तांत सुनाते हैं। वहाँ कोई बहस, सिफारिश, घूस या वकील की आवश्यकता नहीं होती और कोई भ्रष्टाचार नहीं चलता। चित्रगुप्त द्वारा प्रस्तुत कर्म-वृत्तांत के आधार पर यमराज तत्काल निर्णय सुनाते हैं।
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