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विस्तृत उत्तर
यममार्ग में पिंडदान न होने पर आत्मा को अत्यंत कष्ट होता है। जब आत्मा देखती है कि उसके परिजन उसकी संपत्ति के लिए लड़ रहे हैं और उसके लिए पिंडदान नहीं कर रहे, तो वह भूख-प्यास से तड़पती हुई भयंकर विलाप करती है। वह पश्चाताप की अग्नि में जलती है कि उसने जीवन भर जिनके लिए पाप किए, वे आज उसके किसी काम नहीं आ रहे। यममार्ग की यात्रा में आत्मा १६ नगरों से गुजरती है और इन नगरों में उसे परिजनों द्वारा दिए गए पिंड से कुछ सहायता तथा विश्राम मिलता है।
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