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श्राद्ध समय प्रश्नोत्तरी — 16 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित श्राद्ध समय विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 16 प्रश्न

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त्रयोदशी श्राद्ध में रोहिण मुहूर्त क्या है?

कुतप के बाद का शुभ श्राद्ध काल।

रोहिण मुहूर्तत्रयोदशीश्राद्ध समय
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एकादशी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों?

यह पितृ कर्म का मुख्य काल है।

अपराह्नश्राद्ध समयपितृ कर्म
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अष्टमी श्राद्ध में अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

अपराह्न पितरों का मुख्य श्राद्ध समय है।

अपराह्नश्राद्ध समयपितर
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अष्टमी श्राद्ध में कुतुप मुहूर्त क्या है?

श्राद्ध का सबसे श्रेष्ठ समय।

कुतुप मुहूर्तश्राद्ध समयअष्टमी
लोक

कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त श्राद्ध का श्रेष्ठ अष्टम मुहूर्त है।

कुतुप मुहूर्तश्राद्ध समयसप्तमी
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कुतप मुहूर्त क्या है?

कुतप मुहूर्त श्राद्ध का श्रेष्ठ मध्याह्न समय है।

कुतप मुहूर्तश्राद्ध समयपार्वण श्राद्ध
लोक

अपराह्न काल क्यों जरूरी है?

अपराह्न काल पितरों के विचरण का मुख्य समय माना गया है।

अपराह्न कालश्राद्ध समयपितृ विचरण
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कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त श्राद्ध का सर्वोत्तम मध्याह्न काल है।

कुतुप मुहूर्तश्राद्ध समयतृतीया श्राद्ध
लोक

तृतीया श्राद्ध किस समय करें?

तृतीया श्राद्ध कुतुप, रौहिण या अपराह्न काल में करें।

श्राद्ध समयकुतुप मुहूर्तअपराह्न काल
श्राद्ध विधि

द्वितीया श्राद्ध कितने बजे करें?

द्वितीया श्राद्ध दिन के अपराह्न काल में करना चाहिए। सबसे श्रेष्ठ समय है कुतप मुहूर्त 11:36 AM से 12:24 PM तक। फिर रौहिण मुहूर्त 12:24 PM से 01:12 PM तक, और अपराह्न काल 01:12 PM से 03:39 PM तक। ये समय स्थानीय सूर्यास्त के अनुसार परिवर्तित हो सकते हैं। प्रातःकाल और रात्रिकाल में श्राद्ध सर्वथा वर्जित है।

कुतप मुहूर्तरौहिण मुहूर्तअपराह्न काल
श्राद्ध मुहूर्त

अपराह्न काल का समय क्या है?

अपराह्न काल अपराह्न 01:34 से अपराह्न 04:04 तक का विशेष समय है, जो लगभग 2 घंटे 30 मिनट का होता है। यदि पूर्व मुहूर्तों में कार्य पूर्ण न हो, तो इस काल तक ब्राह्मण भोजन और विसर्जन संपन्न कर लेना चाहिए। यह तीन मुहूर्तों में सबसे लंबा और अंतिम है।

अपराह्न कालश्राद्ध समयब्राह्मण भोजन
श्राद्ध मुहूर्त

कुतुप मुहूर्त क्या है?

कुतुप मुहूर्त पूर्वाह्न 11:53 से अपराह्न 12:44 तक का विशेष श्राद्ध समय है। यह सूर्य के पूर्ण प्रभाव का समय है, और इस मुहूर्त में पितर अत्यंत प्रसन्नता से उपस्थित होते हैं। श्राद्ध के तीन मुहूर्तों में यह सबसे पहला और सबसे पवित्र मुहूर्त है।

कुतुप मुहूर्तश्राद्ध समयसूर्य प्रभाव
श्राद्ध मुहूर्त

क्या रात में श्राद्ध हो सकता है?

नहीं, रात्रि में श्राद्ध नहीं हो सकता। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म कभी भी प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।

रात्रि श्राद्धवर्जितश्राद्ध समय
श्राद्ध मुहूर्त

क्या प्रातःकाल श्राद्ध कर सकते हैं?

नहीं, प्रातःकाल श्राद्ध वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।

प्रातःकालश्राद्ध समयवर्जित
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पूर्वाह्न में श्राद्ध क्यों वर्जित माना गया है?

श्राद्ध के लिए कुतप वेला निर्धारित है, इसलिए पूर्वाह्न में श्राद्ध वर्जित माना गया है।

पूर्वाह्न श्राद्धश्राद्ध समयकुतप वेला
लोक

कुतप वेला में श्राद्ध क्यों करना चाहिए?

कुतप वेला पितृकर्म के लिए शास्त्रोक्त मध्याह्न समय है, इसलिए श्राद्ध इसी समय करना चाहिए।

कुतप वेलाश्राद्ध समयपितृ कर्म

विषय-वार प्रश्नोत्तर

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