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सूर्य ग्रहण — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 5 प्रश्न

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शिव पूजा नियम

शिव की पूजा में ग्रहण काल विशेष रूप से शुभ क्यों माना जाता है?

ग्रहण = ब्रह्मांडीय ऊर्जा संकेंद्रण — जप 100-1000 गुना फल। शिव = राहु-केतु नियंत्रक। महामृत्युंजय जप सर्वोत्तम। ग्रहण स्पर्श→मोक्ष तक जप। ग्रहण बाद स्नान + दान।

ग्रहणसूर्य ग्रहणचंद्र ग्रहण
मंत्र विधि

मंत्र जप में ग्रहण काल का क्या विशेष महत्व है?

ग्रहण जप = लाख गुना फल। अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' विधि: स्पर्श→मोक्ष निरंतर जप, स्नान, जल में खड़े। भोजन/शयन वर्जित। सूर्य ग्रहण: गायत्री/आदित्य। चंद्र: शिव मंत्र। गर्भवती: सावधानी। मंत्र सिद्धि का सर्वोत्तम अवसर।

ग्रहणसूर्य ग्रहणचंद्र ग्रहण
ग्रहण

ग्रहण के समय मंत्र जप का क्या विशेष प्रभाव होता है

ग्रहण जप = लाख गुना फल (शास्त्रीय मान्यता)। गायत्री, महामृत्युंजय, इष्ट मंत्र। सूर्य ग्रहण: 'ॐ घृणि सूर्याय नमः'। चन्द्र: 'ॐ सोमाय नमः'। स्पर्श से मोक्ष तक निरन्तर। कुश आसन + पवित्री। मोक्ष बाद स्नान + दान।

ग्रहणमंत्र जपसूर्य ग्रहण
ग्रहण विधि

सूर्य ग्रहण में सूतक का क्या नियम है?

सूर्य ग्रहण सूतक: 12 घण्टे पूर्व (चन्द्र: 9 घण्टे)। वर्जित: भोजन, शुभ कार्य, सोना। करें: जप, ध्यान। अपवाद: क्षेत्र में ग्रहण न दिखे तो सूतक नहीं, रोगी/गर्भवती/बच्चे को भोजन छूट। समाप्ति: ग्रहण मोक्ष + स्नान।

सूतकसूर्य ग्रहणअशुद्धि काल
ग्रहण विधि

ग्रहण काल में पूजा और जप कैसे करें?

ग्रहण काल: स्नान → जप (सर्वोत्तम कर्म, करोड़गुना फल)। सूर्य ग्रहण: सूर्य मंत्र/गायत्री। चन्द्र ग्रहण: चन्द्र मंत्र/महामृत्युंजय। इष्ट मंत्र जप। मोक्ष पर: पुनः स्नान → दान → पूजा। भोजन में तुलसी डालें। सोना वर्जित।

ग्रहणसूर्य ग्रहणचन्द्र ग्रहण

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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