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श्रीमद्भगवद्गीता · भक्ति योग

श्लोक 13

भक्ति योग · Bhakti Yoga

मूल पाठ

अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च | निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र (प्रेमी) और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, निरन्तर सन्तुष्ट, योगी, शरीरको वशमें किये हुए, दृढ़ निश्चयवाला? मेरेमें अर्पित मनबुद्धिवाला जो मेरा भक्त है, वह मेरेको प्रिय है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र (प्रेमी) और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, निरन्तर सन्तुष्ट, योगी, शरीरको वशमें किये हुए, दृढ़ निश्चयवाला? मेरेमें अर्पित मनबुद्धिवाला जो मेरा भक्त है, वह मेरेको प्रिय है।

English Meaning

He who hates no creature, who is friendly and compassionate to all, who is free from attachment and egoism, balanced in pleasure and pain, and forgiving.

He who hates no creature, who is friendly and compassionate to all, who is free from attachment and egoism, balanced in pleasure and pain, and forgiving.

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