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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 24

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः | प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इसलिये वैदिक सिद्धान्तोंको माननेवाले पुरुषोंकी शास्त्रविधिसे नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा 'ऊँ' इस परमात्माके नामका उच्चारण करके ही आरम्भ होती हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इसलिये वैदिक सिद्धान्तोंको माननेवाले पुरुषोंकी शास्त्रविधिसे नियत यज्ञ, दान और तपरूप क्रियाएँ सदा 'ऊँ' इस परमात्माके नामका उच्चारण करके ही आरम्भ होती हैं।

English Meaning

Therefore, with the utterance of "Om" are the acts of sacrifice, gift and austerity as enjoined in the scriptures, always begun by the students of Brahman.

Therefore, with the utterance of "Om" are the acts of sacrifice, gift and austerity as enjoined in the scriptures, always begun by the students of Brahman.

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