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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 16

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

तत्रैवं सति कर्तारमात्मानं केवलं तु यः | पश्यत्यकृतबुद्धित्वान्न स पश्यति दुर्मतिः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

परन्तु ऐसे पाँच हेतुओंके होनेपर भी जो उस (कर्मोंके) विषयमें केवल (शुद्ध) आत्माको कर्ता मानता है, वह दुर्मति ठीक नहीं समझता; क्योंकि उसकी बुद्धि शुद्ध नहीं है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

परन्तु ऐसे पाँच हेतुओंके होनेपर भी जो उस (कर्मोंके) विषयमें केवल (शुद्ध) आत्माको कर्ता मानता है, वह दुर्मति ठीक नहीं समझता; क्योंकि उसकी बुद्धि शुद्ध नहीं है।

English Meaning

Now, such being the case, verily he who owing to untrained understanding looks upon his Self, which is isolated, as the agent, he of perverted intelligence, sees not.

Now, such being the case, verily he who owing to untrained understanding looks upon his Self, which is isolated, as the agent, he of perverted intelligence, sees not.

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