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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 17

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

यस्य नाहंकृतो भावो बुद्धिर्यस्य न लिप्यते | हत्वापि स इमाँल्लोकान्न हन्ति न निबध्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिसका अहंकृतभाव नहीं है और जिसकी बुद्धि लिप्त नहीं होती, वह इन सम्पूर्ण प्राणियोंको मारकर भी न मारता है और न बँधता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिसका अहंकृतभाव नहीं है और जिसकी बुद्धि लिप्त नहीं होती, वह इन सम्पूर्ण प्राणियोंको मारकर भी न मारता है और न बँधता है।

English Meaning

He who is free from the egoistic notion, whose intelligence is not tainted (by good or evil), though he slays these people, he slayeth not, nor is he bound (by the action).

He who is free from the egoistic notion, whose intelligence is not tainted (by good or evil), though he slays these people, he slayeth not, nor is he bound (by the action).

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