ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 28

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः | विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो कर्ता असावधान, अशिक्षित, ऐंठ-अकड़वाला, जिद्दी, उपकारीका अपकार करनेवाला, आलसी, विषादी और दीर्घसूत्री है, वह तामस कहा जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो कर्ता असावधान, अशिक्षित, ऐंठ-अकड़वाला, जिद्दी, उपकारीका अपकार करनेवाला, आलसी, विषादी और दीर्घसूत्री है, वह तामस कहा जाता है।

English Meaning

Unsteady, vulgar, unbending, cheating, malicious, lazy, desponding and procrastinating such an agent is called Tamasic.

Unsteady, vulgar, unbending, cheating, malicious, lazy, desponding and procrastinating such an agent is called Tamasic.

आगे पढ़ें — मोक्ष संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता