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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 31

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

यया धर्ममधर्मं च कार्यं चाकार्यमेव च | अयथावत्प्रजानाति बुद्धिः सा पार्थ राजसी

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पार्थ ! मनुष्य जिसके द्वारा धर्म और अधर्मको, कर्तव्य और अकर्तव्यको भी ठीक तरहसे नहीं जानता, वह बुद्धि राजसी है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पार्थ ! मनुष्य जिसके द्वारा धर्म और अधर्मको, कर्तव्य और अकर्तव्यको भी ठीक तरहसे नहीं जानता, वह बुद्धि राजसी है।

English Meaning

That, by which one wrongly understands Dharma and Adharma and also what ought to be done and what ought not to be done that intellect, O Arjuna, is Rajasic (passionate).

That, by which one wrongly understands Dharma and Adharma and also what ought to be done and what ought not to be done that intellect, O Arjuna, is Rajasic (passionate).

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