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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 32

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसाऽऽवृता | सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पृथानन्दन ! तमोगुणसे घिरी हुई जो बुद्धि अधर्मको धर्म और सम्पूर्ण चीजोंको उलटा मान लेती है, वह तामसी है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पृथानन्दन ! तमोगुणसे घिरी हुई जो बुद्धि अधर्मको धर्म और सम्पूर्ण चीजोंको उलटा मान लेती है, वह तामसी है।

English Meaning

That, which, enveloped in darkness, sees Adharma as Dharma and all things perverted that intellect, O Arjuna, is Tamasic (dark).

That, which, enveloped in darkness, sees Adharma as Dharma and all things perverted that intellect, O Arjuna, is Tamasic (dark).

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