अर्जुन उवाच | संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम् | त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन
अर्थ: अर्जुन बोले -- हे महाबाहो ! हे हृषीकेश ! हे केशिनिषूदन ! मैं संन्यास और त्यागका तत्त्व अलग-अलग जानना चाहता हूँ।
मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga
अधर्मं धर्ममिति या मन्यते तमसाऽऽवृता | सर्वार्थान्विपरीतांश्च बुद्धिः सा पार्थ तामसी
हे पृथानन्दन ! तमोगुणसे घिरी हुई जो बुद्धि अधर्मको धर्म और सम्पूर्ण चीजोंको उलटा मान लेती है, वह तामसी है।
हे पृथानन्दन ! तमोगुणसे घिरी हुई जो बुद्धि अधर्मको धर्म और सम्पूर्ण चीजोंको उलटा मान लेती है, वह तामसी है।
That, which, enveloped in darkness, sees Adharma as Dharma and all things perverted that intellect, O Arjuna, is Tamasic (dark).
That, which, enveloped in darkness, sees Adharma as Dharma and all things perverted that intellect, O Arjuna, is Tamasic (dark).
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