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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 33

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

धृत्या यया धारयते मनःप्राणेन्द्रियक्रियाः | योगेनाव्यभिचारिण्या धृतिः सा पार्थ सात्त्विकी

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पार्थ ! समतासे युक्त जिस अव्यभिचारिणी धृतिके द्वारा मनुष्य मन, प्राण और इन्द्रियोंकी क्रियाओंको धारण करता है, वह धृति सात्त्विकी है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पार्थ ! समतासे युक्त जिस अव्यभिचारिणी धृतिके द्वारा मनुष्य मन, प्राण और इन्द्रियोंकी क्रियाओंको धारण करता है, वह धृति सात्त्विकी है।

English Meaning

The unwavering firmness by which, through Yoga, the functions of the mind, the life-force and the senses are restrained that firmness, O Arjuna, is Sattvic (pure).

The unwavering firmness by which, through Yoga, the functions of the mind, the life-force and the senses are restrained that firmness, O Arjuna, is Sattvic (pure).

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