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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 40

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा पुनः | सत्त्वं प्रकृतिजैर्मुक्तं यदेभिः स्यात्ित्रभिर्गुणैः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

पृथ्वीमें या स्वर्गमें अथवा देवताओंमें तथा इनके सिवाय और कहीं भी वह ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो प्रकृतिसे उत्पन्न इन तीनों गुणोंसे रहित हो।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

पृथ्वीमें या स्वर्गमें अथवा देवताओंमें तथा इनके सिवाय और कहीं भी वह ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो प्रकृतिसे उत्पन्न इन तीनों गुणोंसे रहित हो।

English Meaning

There is no being on earth or again in heaven among the gods, that is liberated from the three qualities born of Nature.

There is no being on earth or again in heaven among the gods, that is liberated from the three qualities born of Nature.

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