अर्जुन उवाच | संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम् | त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन
अर्थ: अर्जुन बोले -- हे महाबाहो ! हे हृषीकेश ! हे केशिनिषूदन ! मैं संन्यास और त्यागका तत्त्व अलग-अलग जानना चाहता हूँ।
मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga
ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परंतप | कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः
हे परंतप ! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रोंके कर्म स्वभावसे उत्पन्न हुए तीनों गुणोंके द्वारा विभक्त किये गये हैं।
हे परंतप ! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रोंके कर्म स्वभावसे उत्पन्न हुए तीनों गुणोंके द्वारा विभक्त किये गये हैं।
Of Brahmanas, Kshatriyas and Vaisyas, as also of Sudras, O Arjuna, the duties are distributed according to the qualities born of their own nature.
Of Brahmanas, Kshatriyas and Vaisyas, as also of Sudras, O Arjuna, the duties are distributed according to the qualities born of their own nature.
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