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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 41

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परंतप | कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे परंतप ! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रोंके कर्म स्वभावसे उत्पन्न हुए तीनों गुणोंके द्वारा विभक्त किये गये हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे परंतप ! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रोंके कर्म स्वभावसे उत्पन्न हुए तीनों गुणोंके द्वारा विभक्त किये गये हैं।

English Meaning

Of Brahmanas, Kshatriyas and Vaisyas, as also of Sudras, O Arjuna, the duties are distributed according to the qualities born of their own nature.

Of Brahmanas, Kshatriyas and Vaisyas, as also of Sudras, O Arjuna, the duties are distributed according to the qualities born of their own nature.

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