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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 55

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः | ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

उस पराभक्तिसे मेरेको, मैं जितना हूँ और जो हूँ -- इसको तत्त्वसे जान लेता है तथा मेरेको तत्त्वसे जानकर फिर तत्काल मेरेमें प्रविष्ट हो जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

उस पराभक्तिसे मेरेको, मैं जितना हूँ और जो हूँ -- इसको तत्त्वसे जान लेता है तथा मेरेको तत्त्वसे जानकर फिर तत्काल मेरेमें प्रविष्ट हो जाता है।

English Meaning

By devotion he knows Me in truth, what and who I am; then having known Me in truth, he forthwith enters into the Supreme.

By devotion he knows Me in truth, what and who I am; then having known Me in truth, he forthwith enters into the Supreme.

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