ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 56

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः | मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मेरा आश्रय लेनेवाला भक्त सदा सब कर्म करता हुआ भी मेरी कृपासे शाश्वत अविनाशी पदको प्राप्त हो जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मेरा आश्रय लेनेवाला भक्त सदा सब कर्म करता हुआ भी मेरी कृपासे शाश्वत अविनाशी पदको प्राप्त हो जाता है।

English Meaning

Doing all actions always having taken refuge in Me, by My grace he obtains the eternal indestructible state of being.

Doing all actions always having taken refuge in Me, by My grace he obtains the eternal indestructible state of being.

आगे पढ़ें — मोक्ष संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता