ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 62

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत | तत्प्रसादात्परां शान्तिं स्थानं प्राप्स्यसि शाश्वतम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन ! तू सर्वभावसे उस ईश्वरकी ही शरणमें चला जा। उसकी कृपासे तू परमशान्ति-(संसारसे सर्वथा उपरति-) को और अविनाशी परमपदको प्राप्त हो जायगा।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशोद्भव अर्जुन ! तू सर्वभावसे उस ईश्वरकी ही शरणमें चला जा। उसकी कृपासे तू परमशान्ति-(संसारसे सर्वथा उपरति-) को और अविनाशी परमपदको प्राप्त हो जायगा।

English Meaning

Fly unto Him for refuge with all thy being, O Arjuna; by His grace thou shalt obtain supreme peace (and) the eternal abode.

Fly unto Him for refuge with all thy being, O Arjuna; by His grace thou shalt obtain supreme peace (and) the eternal abode.

आगे पढ़ें — मोक्ष संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता