ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 71

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

श्रद्धावाननसूयश्च श्रृणुयादपि यो नरः | सोऽपि मुक्तः शुभाँल्लोकान्प्राप्नुयात्पुण्यकर्मणाम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रद्धावान् और दोषदृष्टिसे रहित जो मनुष्य इस गीता-ग्रन्थको सुन भी लेगा, वह भी सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त होकर पुण्यकारियोंके शुभ लोकोंको प्राप्त हो जायगा।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रद्धावान् और दोषदृष्टिसे रहित जो मनुष्य इस गीता-ग्रन्थको सुन भी लेगा, वह भी सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त होकर पुण्यकारियोंके शुभ लोकोंको प्राप्त हो जायगा।

English Meaning

Also the man who hears this, full of faith and free from malice, he, too, liberated, shall attain to the happy worlds of those of righteous deeds.

Also the man who hears this, full of faith and free from malice, he, too, liberated, shall attain to the happy worlds of those of righteous deeds.

आगे पढ़ें — मोक्ष संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता