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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 72

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

कच्चिदेतच्छ्रुतं पार्थ त्वयैकाग्रेण चेतसा | कच्चिदज्ञानसंमोहः प्रनष्टस्ते धनञ्जय

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पृथानन्दन ! क्या तुमने एकाग्र-चित्तसे इसको सुना ?और हे धनञ्जय ! क्या तुम्हारा अज्ञानसे उत्पन्न मोह नष्ट हुआ ?

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पृथानन्दन ! क्या तुमने एकाग्र-चित्तसे इसको सुना ?और हे धनञ्जय ! क्या तुम्हारा अज्ञानसे उत्पन्न मोह नष्ट हुआ ?

English Meaning

Has this been heard, O Arjuna, with one-pointed mind? Has the delusion of thy ignorance been destroyed, O Dhananjaya?

Has this been heard, O Arjuna, with one-pointed mind? Has the delusion of thy ignorance been destroyed, O Dhananjaya?

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