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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 73

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

अर्जुन उवाच | नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा त्वत्प्रसादान्मयाच्युत | स्थितोऽस्मि गतसन्देहः करिष्ये वचनं तव

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अर्जुन बोले -- हे अच्युत ! आपकी कृपासे मेरा मोह नष्ट हो गया है और स्मृति प्राप्त हो गयी है। मैं सन्देहरहित होकर स्थित हूँ। अब मैं आपकी आज्ञाका पालन करूँगा।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अर्जुन बोले -- हे अच्युत ! आपकी कृपासे मेरा मोह नष्ट हो गया है और स्मृति प्राप्त हो गयी है। मैं सन्देहरहित होकर स्थित हूँ। अब मैं आपकी आज्ञाका पालन करूँगा।

English Meaning

Arjuna said Destroyed is my delusion as I have gained my knowledge (memory) through Thy grace, O Krishna. I remain freed from doubts. I will act according to Thy word.

Arjuna said Destroyed is my delusion as I have gained my knowledge (memory) through Thy grace, O Krishna. I remain freed from doubts. I will act according to Thy word.

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