अर्जुन उवाच | संन्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम् | त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन
अर्थ: अर्जुन बोले -- हे महाबाहो ! हे हृषीकेश ! हे केशिनिषूदन ! मैं संन्यास और त्यागका तत्त्व अलग-अलग जानना चाहता हूँ।
मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga
राजन्संस्मृत्य संस्मृत्य संवादमिममद्भुतम् | केशवार्जुनयोः पुण्यं हृष्यामि च मुहुर्मुहुः
हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद कर-करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ।
हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुनके इस पवित्र और अद्भुत संवादको याद कर-करके मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ।
O King, remembering this wonderful and holy dialogue between Krishna and Arjuna, I rejoice again and again.
O King, remembering this wonderful and holy dialogue between Krishna and Arjuna, I rejoice again and again.
आगे पढ़ें — मोक्ष संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता