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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 77

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

तच्च संस्मृत्य संस्मृत्य रूपमत्यद्भुतं हरेः | विस्मयो मे महान् राजन् हृष्यामि च पुनः पुनः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्णके उस अत्यन्त अद्भुत विराट्रूपको याद कर-करके मेरेको बड़ा भारी आश्चर्य हो रहा है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे राजन् ! भगवान् श्रीकृष्णके उस अत्यन्त अद्भुत विराट्रूपको याद कर-करके मेरेको बड़ा भारी आश्चर्य हो रहा है और मैं बार-बार हर्षित हो रहा हूँ।

English Meaning

And, remembering again and again, also that most wonderful form of Hari, great is my wonder, O King; and I rejoice again and again.

And, remembering again and again, also that most wonderful form of Hari, great is my wonder, O King; and I rejoice again and again.

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