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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 8

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

दुःखमित्येव यत्कर्म कायक्लेशभयात्त्यजेत् | स कृत्वा राजसं त्यागं नैव त्यागफलं लभेत्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो कुछ कर्म है, वह दुःखरूप ही है -- ऐसा समझकर कोई शारीरिक क्लेशके भयसे उसका त्याग कर दे, तो वह राजस त्याग करके भी त्यागके फलको नहीं पाता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो कुछ कर्म है, वह दुःखरूप ही है -- ऐसा समझकर कोई शारीरिक क्लेशके भयसे उसका त्याग कर दे, तो वह राजस त्याग करके भी त्यागके फलको नहीं पाता।

English Meaning

He who abandons action on account of the fear of bodily trouble (because it is painful), does not obtain the merit of renunciation by doing such Rajasic renunciation.

He who abandons action on account of the fear of bodily trouble (because it is painful), does not obtain the merit of renunciation by doing such Rajasic renunciation.

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