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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 9

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन | सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे अर्जुन ! 'केवल कर्तव्यमात्र करना है' -- ऐसा समझकर जो नियत कर्म आसक्ति और फलका त्याग करके किया जाता है, वही सात्त्विक त्याग माना गया है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे अर्जुन ! 'केवल कर्तव्यमात्र करना है' -- ऐसा समझकर जो नियत कर्म आसक्ति और फलका त्याग करके किया जाता है, वही सात्त्विक त्याग माना गया है।

English Meaning

Whatever obligatory action is done, O Arjuna, merely because it ought to be done, abandoning attachment and also the desire for reward, that renunciation is regarded as Sattvic (pure).

Whatever obligatory action is done, O Arjuna, merely because it ought to be done, abandoning attachment and also the desire for reward, that renunciation is regarded as Sattvic (pure).

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