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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 11

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम् | धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन! बलवालोंमें काम और रागसे रहित बल मैं हूँ। मनुषयोंमें धर्मसे अविरुद्ध (धर्मयुक्त) काम मैं हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन! बलवालोंमें काम और रागसे रहित बल मैं हूँ। मनुषयोंमें धर्मसे अविरुद्ध (धर्मयुक्त) काम मैं हूँ।

English Meaning

Of the strong, I am the strength devoid of desire and attachment, and in (all) beings, I am the desire unopposed to Dharma, O Arjuna.

Of the strong, I am the strength devoid of desire and attachment, and in (all) beings, I am the desire unopposed to Dharma, O Arjuna.

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