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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 12

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये | मत्त एवेति तान्विद्धि नत्वहं तेषु ते मयि

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(और तो क्या कहूँ) जितने भी सात्त्विक, राजस और तामस भाव हैं, वे सब मुझ से ही होते हैं -- ऐसा समझो। पर मैं उनमें और वे मेरेमें नहीं हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

(और तो क्या कहूँ) जितने भी सात्त्विक, राजस और तामस भाव हैं, वे सब मुझ से ही होते हैं -- ऐसा समझो। पर मैं उनमें और वे मेरेमें नहीं हैं।

English Meaning

Whatever beings (and objects) that are pure, active and inert, know that they proceed from Me. They are in Me, yet I am not in them.

Whatever beings (and objects) that are pure, active and inert, know that they proceed from Me. They are in Me, yet I am not in them.

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