श्रीभगवानुवाच | मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः | असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु
अर्थ: श्रीभगवान् बोले -- हे पृथानन्दन! मुझमें आसक्त मनवाला, मेरे आश्रित होकर योगका अभ्यास करता हुआ तू मेरे समग्ररूपको निःसन्देह जैसा जानेगा, उसको सुन।
ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga
अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् | देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि
परन्तु उन अल्पबुद्धिवाले मनुष्योंको उन देवताओंकी आराधनाका फल अन्तवाला (नाशवान्) ही मिलता है। देवताओंका पूजन करनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त मेरे ही प्राप्त होते हैं।
परन्तु उन अल्पबुद्धिवाले मनुष्योंको उन देवताओंकी आराधनाका फल अन्तवाला (नाशवान्) ही मिलता है। देवताओंका पूजन करनेवाले देवताओंको प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त मेरे ही प्राप्त होते हैं।
Verily the reward (fruit) that accrues to those men of small intelligence is finite. The worshippers of the gods go to them, but My devotees come to Me.
Verily the reward (fruit) that accrues to those men of small intelligence is finite. The worshippers of the gods go to them, but My devotees come to Me.
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