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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 24

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

अव्यक्तं व्यक्ितमापन्नं मन्यन्ते मामबुद्धयः | परं भावमजानन्तो ममाव्ययमनुत्तमम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

बुद्धिहीन मनुष्य मेरे सर्वश्रेष्ठ अविनाशी परमभावको न जानते हुए अव्यक्त (मन-इन्द्रियोंसे पर) मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्माको मनुष्यकी तरह ही शरीर धारण करनेवाला मानते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

बुद्धिहीन मनुष्य मेरे सर्वश्रेष्ठ अविनाशी परमभावको न जानते हुए अव्यक्त (मन-इन्द्रियोंसे पर) मुझ सच्चिदानन्दघन परमात्माको मनुष्यकी तरह ही शरीर धारण करनेवाला मानते हैं।

English Meaning

The foolish think of Me, the Unmanifest, as having manifestation, knowing not My higher, immutable and most excellent nature.

The foolish think of Me, the Unmanifest, as having manifestation, knowing not My higher, immutable and most excellent nature.

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