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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 25

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

नाहं प्रकाशः सर्वस्य योगमायासमावृतः | मूढोऽयं नाभिजानाति लोको मामजमव्ययम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो मूढ़ मनुष्य मेरेको अज और अविनाशी ठीक तरहसे नहीं जानते (मानते), उन सबके सामने योगमायासे अच्छी तरहसे आवृत हुआ मैं प्रकट नहीं होता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो मूढ़ मनुष्य मेरेको अज और अविनाशी ठीक तरहसे नहीं जानते (मानते), उन सबके सामने योगमायासे अच्छी तरहसे आवृत हुआ मैं प्रकट नहीं होता।

English Meaning

I am not manifest to all (as I am) veiled by the Yoga-Maya. This deluded world does not know Me, the unborn and imperishable.

I am not manifest to all (as I am) veiled by the Yoga-Maya. This deluded world does not know Me, the unborn and imperishable.

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