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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक 27

ज्ञान विज्ञान योग · Jnana Vijnana Yoga

मूल पाठ

इच्छाद्वेषसमुत्थेन द्वन्द्वमोहेन भारत | सर्वभूतानि संमोहं सर्गे यान्ति परन्तप

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशमें उत्पन्न परंतप ! इच्छा (राग) और द्वेषसे उत्पन्न होनेवाले द्वन्द्व-मोहसे मोहित सम्पूर्ण प्राणी संसारमें मूढ़ताको अर्थात् जन्म-मरणको प्राप्त हो रहे हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशमें उत्पन्न परंतप ! इच्छा (राग) और द्वेषसे उत्पन्न होनेवाले द्वन्द्व-मोहसे मोहित सम्पूर्ण प्राणी संसारमें मूढ़ताको अर्थात् जन्म-मरणको प्राप्त हो रहे हैं।

English Meaning

By the delusion of the pairs of opposites arising from desire and aversion, O Bharata, all beings are subject to delusion at birth, O Parantapa.

By the delusion of the pairs of opposites arising from desire and aversion, O Bharata, all beings are subject to delusion at birth, O Parantapa.

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