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18 मार्च 2026

18 मार्च 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

18 मार्च 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपद
योग
शुभ
करण
शकुनि
वार
बुधवार
हिन्दू मास
चैत्र
ऋतु
वसन्त
सूर्योदय
06:28
सूर्यास्त
18:31

आज के पर्व

अमावस्याAnvadhan

18 मार्च 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

तंत्र साधना में काली रात का क्या महत्व है?

अमावस्या = काली शक्ति सर्वोच्च, तामसिक ऊर्जा (उग्र देवी), गोपनीय, मन शून्य (चंद्र अनुपस्थित)। दीपावली = काली+लक्ष्मी। सौम्य = पूर्णिमा। उन्नत — गुरु।

बुधवार को कौन से काम शुभ?

बुधवार=बुध(बुद्धि/व्यापार)। सभी कार्य शुभ — व्यापार, दुकान, बैंक, शिक्षा, लेखन, संचार, गृहप्रवेश। कोई विशेष वर्जना नहीं।

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में पूजा का क्या अंतर है?

चैत्र: वसंत, नववर्ष, सौम्य देवी, राम नवमी। शारदीय: शरद, उग्र देवी, दशहरा/रावण दहन, बंगाल दुर्गा पूजा। पूजा विधि समान — घटस्थापना, 9 दिन, सप्तशती।

तंत्र साधना में अमावस्या क्यों विशेष मानी जाती है?

अमावस्या = सबसे अंधेरी रात = शक्ति स्रोत (काली)। चंद्र=मन शून्य → अंतर्मुखी ध्यान। सूक्ष्म ऊर्जा तीव्र। पितृ तिथि। काली/भैरव साधना विशेष। सात्विक (तर्पण/ध्यान) = सभी। तामसिक = दीक्षित।

गणेश चालीसा पढ़ने की विधि और नियम क्या हैं?

विधि: स्नान → पूर्व/उत्तर मुख → दीपक → सिंदूर, दूर्वा, मोदक → 'ॐ गं गणपतये नमः' 3 बार → चालीसा → आरती। बुधवार/चतुर्थी विशेष। तुलसी वर्जित। 21/40 दिन निरंतर = विशेष फल। फल: विघ्न नाश, बुद्धि, सफलता।

काली पूजा में रात को दीपदान का क्या महत्व है?

अंधकार→प्रकाश = अज्ञान नाश। अमावस्या + दीपक = काली कृपा। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय।' काली = बाहर अंधकार, भीतर ज्योति। 14 दीपक, सरसों तेल/घी, चारों कोनों + द्वार।

देवी की पूजा पूर्णिमा को करें या अमावस्या को?

सौम्य (लक्ष्मी/सरस्वती) = पूर्णिमा। उग्र (काली/छिन्नमस्ता) = अमावस्या। सर्वोत्तम = अष्टमी/नवमी। नवरात्रि 9 दिन। दीपावली अमावस्या = काली+लक्ष्मी दोनों।

अमावस्या पर तर्पण कैसे करें?

अमावस्या = पितरों का विशेष दिन। सूर्योदय से पहले स्नान, दक्षिण मुख, तिल-जल तर्पण (3 पीढ़ी)। कौवे+गाय को भोजन। पीपल जल। सात्विक भोजन। सोमवती/मौनी अमावस्या विशेष।

बुधवार को गणेश पूजा करने का क्या विशेष विधान है?

बुधवार = बुद्धि दिवस, गणेश = बुद्धि देवता। विधान: पंचामृत अभिषेक, सिंदूर, 21 दूर्वा, मोदक, 108 जप, अथर्वशीर्ष/चालीसा, हरे मूंग प्रसाद। 21 बुधवार व्रत = मनोकामना पूर्ति। फल: बुद्धि, वाक्शक्ति, व्यापार लाभ, बुध शांति।

शिव पूजा में अमावस्या और पूर्णिमा में कौन सा दिन श्रेष्ठ है?

अमावस्या > पूर्णिमा (शिव = संहारक, अंधकार)। किन्तु सर्वश्रेष्ठ = चतुर्दशी (शिवरात्रि)। पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा (शिव=आदि गुरु), श्रावण पूर्णिमा शुभ। शिव = काल से परे — कोई भी तिथि शुभ।

शिव की पूजा में चतुर्दशी तिथि का क्या विशेष महत्व है?

चतुर्दशी = शिवरात्रि — शिव पूजा की सर्वश्रेष्ठ तिथि। शिव पुराण: इसी रात्रि ज्योतिर्लिंग प्रकट। चंद्र कला न्यूनतम = शिव शक्ति अधिकतम। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी प्रत्येक मास = मासिक शिवरात्रि। महाशिवरात्रि सर्वोपरि।

शस्त्रहत पितरों का श्राद्ध कब होता है?

चतुर्दशी को।

हिंसक अकाल मृत्यु का श्राद्ध कब करें?

चतुर्दशी तिथि को।

चतुर्दशी और त्रयोदशी श्राद्ध में क्या अंतर है?

त्रयोदशी बाल/युवा; चतुर्दशी हिंसक मृत्यु।

गजाच्छाया योग कब बनता है?

हस्त, मघा और त्रयोदशी/अमावस्या संयोग पर।

अकाल मृत्यु का श्राद्ध किस दिन करें?

पितृ पक्ष की चतुर्दशी को।

अकाल मृत्यु का श्राद्ध एकादशी को होता है क्या?

नहीं, चतुर्दशी को।

दशमी को अकाल मृत्यु हो तो श्राद्ध कब करें?

चतुर्दशी को।

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