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23 अप्रैल 2026

23 अप्रैल 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

23 अप्रैल 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल सप्तमी
नक्षत्र
पुनर्वसु
योग
सुकर्मा
करण
गर
वार
गुरुवार
हिन्दू मास
वैशाख
ऋतु
वसन्त
सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
18:51

आज के पर्व

गंगा

23 अप्रैल 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

विष्णु जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

विष्णु-पूजा के लिए — गुरुवार (प्रमुख दिन, पीले वस्त्र और केले का भोग), एकादशी (प्रिय तिथि), वैशाख और कार्तिक मास (विशेष पुण्यकारी)। जन्माष्टमी और रामनवमी अवतार-पर्व हैं।

गुरु ग्रह मजबूत करने के गुरुवार उपाय?

विष्णु-लक्ष्मी पूजा, केला वृक्ष पूजा, 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 108, हल्दी/चना/पीला/पुस्तक दान, गुरुवार व्रत, पुखराज(ज्योतिषी), पीले वस्त्र। ज्ञान बांटें+दान=गुरु प्रसन्न।

दुर्गा पूजा में सप्तमी अष्टमी नवमी का क्या विशेष महत्व है?

सप्तमी: नबपत्रिका, प्राण प्रतिष्ठा, नेत्रोन्मीलन। अष्टमी: संधि पूजा (108 दीपक), कुमारी पूजा = सर्वशक्तिशाली। नवमी: हवन/पूर्णाहुति, कन्या पूजन, वरदान।

गंगा को 'विष्णुपदी' क्यों कहते हैं?

गंगा को विष्णुपदी इसलिए कहते हैं क्योंकि भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के चरण के स्पर्श से कारण-जल गुलाबी आभा से युक्त होकर गंगा बनी। 'विष्णुपदी' = विष्णु के चरणों से उत्पन्न।

मार्कण्डेय पुराण में गंगा की चार धाराओं का वर्णन कैसे है?

मार्कण्डेय पुराण में गंगा की चार धाराओं का विस्तृत भौगोलिक मार्ग बताया गया है — सीता (पूर्व-भद्राश्व), अलकनंदा (दक्षिण-भारतवर्ष), चक्षु (पश्चिम-केतुमाल), सोमा (उत्तर-उत्तरकुरु)।

जम्बूद्वीप में देवी गंगा कहाँ-कहाँ प्रवाहित होती हैं?

गंगा जम्बूद्वीप के चार वर्षों में प्रवाहित होती हैं — सीता (भद्राश्व), अलकनंदा (भारतवर्ष), चक्षु (केतुमाल), सोमा (उत्तरकुरु)। साथ ही चार सरोवरों को भी भरती हैं।

भगवान वामन के चरण से गंगा का जन्म कैसे हुआ?

भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के बाएं पैर के नाखून से ब्रह्मांड का आवरण टूटा और बाहर का कारण-जल भीतर आया। उस जल पर चरण-स्पर्श से 'विष्णुपदी गंगा' बनी।

गंगा की चार धाराओं के नाम और दिशाएँ क्या हैं?

गंगा की चार धाराएँ — सीता (पूर्व, भद्राश्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण, भारतवर्ष), चक्षु (पश्चिम, केतुमाल), सोमा/भद्रा (उत्तर, उत्तरकुरु)।

भूलोक पर गंगा की कितनी धाराएँ हैं?

गंगा मेरु पर्वत से चार धाराओं में बँटती हैं — सीता (पूर्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण), चक्षु (पश्चिम) और सोमा/भद्रा (उत्तर)।

गंगा नदी का भूलोक पर अवतरण कैसे हुआ?

भगवान वामन के त्रिविक्रम स्वरूप के चरण के नाखून से ब्रह्मांड का आवरण टूटा और बाहर का कारण-जल भीतर आया। चरण-स्पर्श से वह 'विष्णुपदी गंगा' बनी।

भगीरथ ने शिव जी से गंगा को क्यों माँगा था?

भगीरथ ने शिव से गंगा इसलिए माँगी क्योंकि उनके पूर्वज — राजा सगर के साठ हजार पुत्र — कपिल मुनि के क्रोध से भस्म हो गए थे और उनकी मुक्ति गंगाजल से ही संभव थी। गंगा का प्रचंड वेग संभालने के लिए शिव की जटाओं की आवश्यकता थी।

तीर्थ यात्रा से पापों का नाश कैसे होता है?

तीर्थ यात्रा = तप + पवित्र जल + संत संग + मन शुद्धि। प्रमुख: प्रयागराज (संगम), काशी, गया (पितृ तर्पण), रामेश्वरम, चार धाम। शर्त: श्रद्धा + पश्चाताप + सदाचार। बिना भक्ति भाव तीर्थ व्यर्थ (कबीर)।

हल्दी तिलक कब लगाना शुभ है

हल्दी तिलक गुरुवार को, मांगलिक कार्यों के आरंभ में, गणेश-लक्ष्मी पूजन में और विवाह-संस्कार में विशेष रूप से शुभ है। यह बृहस्पति ग्रह को बल देता है और मंगलाचरण का प्रतीक है।

गुरुवार को कौन से काम शुभ?

गुरुवार=बृहस्पति(ज्ञान/धन)। सबसे शुभ — विवाह, गृहप्रवेश, शिक्षा, पूजा, सोना खरीद, दान। सत्यनारायण कथा। कोई वर्जना नहीं।

शिव की जटाओं में गंगा का वास होने का आध्यात्मिक रहस्य क्या है?

भगीरथ कथा: गंगा वेग से पृथ्वी रक्षा हेतु शिव ने जटाओं में धारण किया। आध्यात्मिक: गंगा = ज्ञान (नियंत्रित प्रवाह), सहस्रार चक्र का अमृत, शुद्धि शक्ति, करुणा (कठिनतम भार स्वयं धारण), नारी शक्ति का सर्वोच्च सम्मान।

शिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?

शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।

गुरुवार को केले का दान क्यों करते हैं?

गुरुवार = बृहस्पति (गुरु) दिन। केला = पीला (गुरु का रंग) + विष्णु/बृहस्पति प्रतीक। विधि: पीले केले + 'ॐ बृहस्पतये नमः' + दान। लाभ: ज्ञान, सम्मान, संतान सुख, विवाह बाधा दूर।

नदी में स्नान करते समय कौन सा मंत्र बोलें?

सप्त नदी: 'गंगे च यमुने चैव...' गंगा: 'ॐ नमो गंगायै...' सामान्य: 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' सरल: 3 डुबकी + 'ॐ नमः शिवाय'/'हर हर गंगे'।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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23 अप्रैल 2026 — आज का पंचांग और प्रश्नोत्तर — 18