भगवान कृष्ण नाम मंत्र
द्वारिकाधीश
व्यापार में अपार वृद्धि, राजसत्ता लाभ, नेतृत्व क्षमता एवं अपार ऐश्वर्य की प्राप्ति।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
व्यापार में अपार वृद्धि, राजसत्ता लाभ, नेतृत्व क्षमता एवं अपार ऐश्वर्य की प्राप्ति।
इस मंत्र से क्या होगा?
व्यापार में अपार वृद्धि, राजसत्ता लाभ, नेतृत्व क्षमता एवं अपार ऐश्वर्य की प्राप्ति
जाप विधि
तुलसी या स्फटिक माला पर नियमपूर्वक जप, राजसी स्वरूप का ध्यान।
विशेष टिप्पणियाँ
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या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।। 28
ugra mantraॐ ऐं ह्रीं महाकालिकायै सर्व शत्रु नाशाय नाशाय
sabar mantraओम नमो भूत प्रेत पिशाच दुष्ट दृष्टि विनाशाय ओम क्लीम स्वाहा 27
navgrah mantraदेवानांच ऋषीनांच गुरुं कांचन सन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥
jap mantraॐ
dhyan mantraॐ जटाजूटसमायुक्तमर्धेन्दुकृतलक्षणम्। लोचनत्रयसंयुक्तं पातु मां सर्वतोमुखीम्॥