भगवान कार्तिकेय नाम मंत्र
षण्मुख
चारों दिशाओं, ऊपर और नीचे से आने वाली विपत्तियों से पूर्ण सुरक्षा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
चारों दिशाओं, ऊपर और नीचे से आने वाली विपत्तियों से पूर्ण सुरक्षा।
इस मंत्र से क्या होगा?
चारों दिशाओं, ऊपर और नीचे से आने वाली विपत्तियों से पूर्ण सुरक्षा
जाप विधि
सभी ६ दिशाओं (चार दिशाएं, आकाश, पाताल) का ध्यान करते हुए मानसिक जप।
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अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्य विमर्दनम्। सिंहिकागर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
jap mantraॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा
dhyan mantraध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्। वामाङ्कारूढ सीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचन्द्रम्॥
siddh mantraॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा
sabar mantraॐ पीर बजरंगी राम लक्ष्मण के संगी, जहां जहां जाए, फतह के डंके बजाये, दुहाई माता अञ्जनि की आन 9
tantrik mantraॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा