भगवान (नरसिंह अवतार) नाम मंत्र
उग्र नरसिंह
आकस्मिक विपत्तियों से अचूक रक्षा एवं अत्यंत क्रूर शत्रुओं का स्तंभन।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
आकस्मिक विपत्तियों से अचूक रक्षा एवं अत्यंत क्रूर शत्रुओं का स्तंभन।
इस मंत्र से क्या होगा?
आकस्मिक विपत्तियों से अचूक रक्षा एवं अत्यंत क्रूर शत्रुओं का स्तंभन
जाप विधि
भारी संकट या प्राणों पर संकट के समय उच्च स्वर में वैखरी जप।
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
beej mantraल्क्ष्मीः
sabar mantraधन जैसे चुंबक खींचे लोह गोरख की आज्ञा टले नहीं मिटे साधक का मोह कीड़ा जागे पिंगला जागे सुष्मना का खुले द्वार जब तीनों नाड़ी जागे धन आवे बारंबार जैसे गंगा बहे अविरल जैसे सूरज देत उजास वैसे मेरे घर में लक्ष्मी करे सदा ही वास रुका धन चले बंद धन खुले आवे चहुं ओर से धन गोरख का शब्द सांचा रे सांचा रे गुरु का मन काल का भी काल है गोरख तीनों लोक बसेरा जो गोरख का नाम ले साधक उसका होए उजेरा उठ उठ लक्ष्मी आव बैठ मेरे द्वार गोरख की आज्ञा लेकर आव कर मेरा उद्धार शब्द सांचा पिंड कांचा सांची गुरु की बानी हुकुम गोरखनाथ का चले यही नाथ की निशानी 5
kavach mantraॐ यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्। यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥ अस्ति गुह्यतमं विप्र सर्वभूतोपकारकम्। देव्यास्तु कवचं पुण्यं तच्छृणुष्व महामुने॥ प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥ पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च। सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥ नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः। उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥ शाकिनी तथा अंतरिक्षचरा घोरा डाकिन्यश्च महाबलाय प्रभु तपिश न धीर वृषभ वृषभ लो कुष्मांडा ब्रॉदर यह नश्यंति दर्शनात्तस्य कवचे 9
kaamya mantraॐ ऐं ऐं श्रीं श्रीं ह्रीं श्रीं पूर्ण पूर्ण वाक्सिद्धिं वाक्सिद्धिं दिव्यं दिव्यं आगच्छ आगच्छ ह्रीं श्रीं श्रीं ऐं ऐं ॐ ॐ नमः नमः।
mool mantraॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय