लोकसप्तमी तिथि के देवता कौन हैं?सप्तमी तिथि के अधिष्ठाता देव सूर्य माने गए हैं।#सप्तमी देवता#सूर्य#भास्कर
लोकमेधातिथि ने वसु-रुद्र-आदित्य सिद्धांत की क्या व्याख्या की?मेधातिथि ने कहा कि पूर्वजों को वसु, रुद्र और आदित्य रूप जानकर व्यक्ति श्रद्धा से श्राद्ध करे, क्योंकि यह वेद-विहित शाश्वत व्यवस्था है।#मेधातिथि#मनुस्मृति#वसु रुद्र आदित्य
सूर्य अर्घ्यअर्घ्य देते समय दृष्टि कहाँ रखनी चाहिए — इसका वैज्ञानिक कारण क्या है?अर्घ्य देते समय दृष्टि: गिरती जलधारा के बीच से सूर्य बिंब पर। वैज्ञानिक कारण: क्रोमोथेरेपी (Chromotherapy) का प्राचीन स्वरूप। जलधारा से छनकर प्रातःकालीन सूर्य रश्मियाँ = नेत्र ज्योति वृद्धि + पीनियल ग्रंथि सक्रिय + सर्कैडियन रिदम संतुलित।#अर्घ्य दृष्टि#क्रोमोथेरेपी#पीनियल ग्रंथि
सूर्यसूर्य देव को अर्घ्य देते समय किस मंत्र का जप करना चाहिएसूर्य अर्घ्य के समय 'ॐ सूर्याय नमः' या सूर्य के १२ नामों का जप करना सौभाग्य और आरोग्य प्रदान करता है।#सूर्य#अर्घ्य#आरोग्य
ज्योतिष दोष एवं उपायसूर्य ग्रह मजबूत करने रविवार उपायरविवार: अर्घ्य+आदित्य हृदय+'ॐ सूं सूर्याय नमः' 108+लाल वस्त्र+गुड़/गेहूं दान+माणिक+पिता सम्मान+गायत्री।#सूर्य#रविवार#उपाय
दैनिक आचाररविवार को लाल रंग पहनने का महत्वरविवार = लाल/केसरिया (सूर्य)। तेज, अधिकार, स्वास्थ्य, नेतृत्व। सूर्य पूजा, अर्घ्य। माणिक रत्न। ज्योतिष परंपरा।#रविवार#लाल#सूर्य
दैनिक कर्मसूर्य को जल देते समय किस दिशा में खड़े होंसूर्य को जल देते समय मुख सदैव पूर्व दिशा (सूर्योदय की दिशा) की ओर रखें। खुले स्थान पर नंगे पैर खड़े होकर, दोनों हाथों से तांबे का लोटा उठाकर धारा से जल अर्पित करें। जल की धारा से सूर्य किरणें देखना शुभ है। पूर्व दिशा देवताओं की दिशा मानी गई है।#सूर्य अर्घ्य#दिशा#पूर्व दिशा
पूजा विधिरविवार को सूर्य देव की पूजा कैसे करें?सूर्योदय पर तांबे लोटे से अर्घ्य (जल+रोली+लाल फूल), 'ॐ सूर्याय नमः' 11 बार, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य नमस्कार। गुड़+गेहूँ दान। खड़े होकर अर्घ्य। लाभ: स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सरकारी सफलता।#रविवार#सूर्य पूजा#अर्घ्य
वार शास्त्ररविवार को कौन से काम शुभ?रविवार=सूर्य(अधिकार/सरकार)। शुभ: सूर्य पूजा, सरकारी कार्य, पद, माणिक। गृहप्रवेश/विवाह कुछ में वर्जित। सूर्य नमस्कार।#रविवार#शुभ#सूर्य