विष्णु मंत्रनरसिंह मंत्र का जप शत्रु निवारण के लिए कैसे करें?'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं...' / 'ॐ क्ष्रौं नृसिंहाय नमः'। मंगलवार/शनिवार, संध्या, 108/1008। शत्रु भय, कोर्ट विजय, अभय। हिरण्यकशिपु वध = अत्याचार नाश।#नरसिंह#शत्रु#निवारण
विष्णु भक्तिसुदर्शन मंत्र का जप सुरक्षा के लिए कैसे करें?'ॐ सुदर्शनाय विद्महे महाज्वालाय धीमहि तन्नो चक्रः प्रचोदयात्'। सरल: 'ॐ नमो भगवते सुदर्शनाय नमः' 108। तुलसी माला, बुधवार/गुरुवार। शत्रु से बचाव। दक्षिण भारत में सुदर्शन होम प्रचलित। बिना दीक्षा सरल जप मान्य।#सुदर्शन#चक्र#सुरक्षा
कर्मकांड विधिआचमन का मंत्र क्या है और इसकी विधि क्या है?आचमन के लिए हाथ में जल लेकर तीन बार क्रमशः 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः' और 'ॐ माधवाय नमः' बोलकर जल ग्रहण किया जाता है। अंत में 'ॐ हृषीकेशाय नमः' बोलकर हाथ धो लिए जाते हैं।#आचमन#शुद्धि#नारायण
मंत्र साधनाविष्णु अष्टाक्षर मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' के लाभअष्टाक्षर मंत्र 'ॐ नमो नारायणाय' पूर्ण समर्पण जाग्रत करता है, सभी पापों को नष्ट करता है, विपत्तियों से रक्षा करता है और अंततः साधक को मोक्ष (बैकुंठ) प्रदान करता है।#विष्णु#अष्टाक्षर#नारायण
पूजा विधि एवं कर्मकांडविष्णु जी का सबसे प्रभावी मंत्र कौन सा हैविष्णु के सर्वप्रभावी मंत्र — नित्य जप के लिए 'ॐ नमो नारायणाय' (या द्वादशाक्षरी 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'), विष्णु गायत्री — 'ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि...', और स्तुति के लिए 'शान्ताकारं भुजगशयनं...'।#विष्णु मंत्र#नारायण मंत्र#विष्णु गायत्री
मंत्र साधनाघर की सुख-शांति के लिए विष्णु मंत्रपारिवारिक क्लेश दूर कर घर में प्रेम और शांति स्थापित करने के लिए प्रतिदिन भगवान विष्णु के द्वादशाक्षर मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का सपरिवार जप करना चाहिए।#सुख-शांति#विष्णु#क्लेश निवारण
स्तोत्रविष्णु सहस्रनाम के सिद्ध मंत्रसमय के अभाव में 'श्री राम राम रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥' का तीन बार पाठ करने से पूरे विष्णु सहस्रनाम का पुण्य प्राप्त होता है।#विष्णु सहस्रनाम#सिद्ध श्लोक#श्री राम
माला नियमतुलसी माला से जप करने के नियम क्या हैं?विष्णु/कृष्ण/राम/लक्ष्मी। शिव = वर्जित। गंगाजल + विष्णु मंत्र शुद्धि। कंठी = वैष्णव (सदा पहनें)। जप माला ≠ कंठी। तुलसी + विष्णु सहस्रनाम = सर्वोत्तम।#तुलसी#माला#जप
मंत्र विधिवैजयंती माला से जप करने से क्या लाभ मिलता है?वैजयंती = कृष्ण/विष्णु को अत्यंत प्रिय (स्वयं धारण करते)। लाभ: विष्णु कृपा, लक्ष्मी प्रसन्नता, ग्रह शांति (शनि), आत्मविश्वास, विवाह बाधा निवारण। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108। शुक्रवार/सोमवार। तुलसी का शुभ विकल्प।#वैजयंती#माला#विष्णु
मंत्र विधिधन्वंतरि मंत्र का जप रोग मुक्ति के लिए कैसे करें?'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये...सर्वामयविनाशनाय...नमः'। सरल: 'ॐ धन्वंतरये नमः' 108 बार। तुलसी माला, पीले वस्त्र। धनतेरस = धन्वंतरि जयंती सर्वोत्तम। फल: रोग निवारण, स्वास्थ्य। चिकित्सा + मंत्र = दोनों।#धन्वंतरि#रोग मुक्ति#आयुर्वेद
मंत्र विधिप्रेत मुक्ति के लिए कौन सा मंत्र जपें?'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108 बार, महामृत्युंजय 1,25,000, गीता 15वाँ अध्याय, गरुड़ पुराण पाठ। नारायण बलि + गया पिंडदान = सर्वश्रेष्ठ। विद्वान पंडित से करवाएँ।#प्रेत मुक्ति#मंत्र#गरुड़ पुराण
लोकविष्णु पुराण में द्वादशाक्षर मंत्र का क्या महत्व बताया गया है?द्वादशाक्षर मंत्र का चिंतन करने वाले ज्ञानी योगी ऊर्ध्व लोकों को प्राप्त कर पुनः नहीं लौटते।#द्वादशाक्षर मंत्र#ॐ नमो भगवते वासुदेवाय#विष्णु पुराण
मंत्र और स्तोत्रभगवान विष्णु को जगाने का मंत्र क्या है?जाग्रत मंत्र: 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत्सुप्तमिदं भवेत्...' अर्थ: हे गोविंद! जागें — आपके सोने पर सारा जगत सुप्त हो जाता है। इस मंत्र से चातुर्मास समाप्त और मांगलिक कार्य शुरू।#विष्णु जागरण मंत्र#उत्तिष्ठ गोविंद#देवउठनी