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तिथि से जुड़े सभी प्रश्न(13)

तिथि पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 13 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंत्र जप नियम

मंत्र जप में एकादशी का क्या विशेष महत्व है?

विष्णु तिथि — विष्णु/कृष्ण जप सर्वोत्तम। उपवास+जप = द्विगुणित। सात्विक ऊर्जा। निर्जला = सबसे शक्तिशाली। 11 = एकादश रुद्र/सिद्धि।

#एकादशी#जप#विशेष
देवी पूजा नियम

देवी की पूजा पूर्णिमा को करें या अमावस्या को?

सौम्य (लक्ष्मी/सरस्वती) = पूर्णिमा। उग्र (काली/छिन्नमस्ता) = अमावस्या। सर्वोत्तम = अष्टमी/नवमी। नवरात्रि 9 दिन। दीपावली अमावस्या = काली+लक्ष्मी दोनों।

#पूर्णिमा#अमावस्या#देवी
मंत्र जप नियम

मंत्र जप में कौन से दिन विशेष शुभ माने जाते हैं?

सोमवार=शिव, मंगलवार=हनुमान/दुर्गा, शुक्रवार=लक्ष्मी। चतुर्थी=गणेश, एकादशी=विष्णु, अमावस्या=शिव/काली। नवरात्रि, शिवरात्रि, ग्रहण (1000 गुना)। ब्रह्ममुहूर्त सर्वशुभ।

#दिन#शुभ#तिथि
शिव पूजा नियम

शिव पूजा में अमावस्या और पूर्णिमा में कौन सा दिन श्रेष्ठ है?

अमावस्या > पूर्णिमा (शिव = संहारक, अंधकार)। किन्तु सर्वश्रेष्ठ = चतुर्दशी (शिवरात्रि)। पूर्णिमा: गुरु पूर्णिमा (शिव=आदि गुरु), श्रावण पूर्णिमा शुभ। शिव = काल से परे — कोई भी तिथि शुभ।

#अमावस्या#पूर्णिमा#श्रेष्ठ
शिव पर्व

शिव की पूजा में चतुर्दशी तिथि का क्या विशेष महत्व है?

चतुर्दशी = शिवरात्रि — शिव पूजा की सर्वश्रेष्ठ तिथि। शिव पुराण: इसी रात्रि ज्योतिर्लिंग प्रकट। चंद्र कला न्यूनतम = शिव शक्ति अधिकतम। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी प्रत्येक मास = मासिक शिवरात्रि। महाशिवरात्रि सर्वोपरि।

#चतुर्दशी#शिवरात्रि#तिथि
पितृ पक्ष

पितृ पक्ष कब शुरू होता है?

पितृ पक्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरंभ होता है। इसका प्रथम दिन 'प्रतिपदा' कहलाता है, जिसे प्रतिपदा श्राद्ध या पड़वा श्राद्ध भी कहते हैं। कुल 16 दिनों तक चलता है।

#पितृ पक्ष आरंभ#भाद्रपद पूर्णिमा#तिथि
तिथि एवं पंचांग

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कब होता है?

यह व्रत हर हिंदू महीने के 'कृष्ण पक्ष' (अंधेरे पखवाड़े) की चतुर्थी (चौथी) तिथि को रखा जाता है।

#तिथि#कृष्ण पक्ष#चतुर्थी
श्राद्ध एवं पितृ कर्म

श्राद्ध कर्म कौन कौन से दिन करने चाहिए

पुण्यतिथि (वार्षिक), पितृपक्ष (भाद्रपद 15 दिन), मासिक (प्रथम वर्ष), अमावस्या (हर माह), सोमवती अमावस्या, ग्रहण, मकर संक्रांति, तीर्थ पर। कुतप काल (दोपहर) सर्वोत्तम।

#श्राद्ध#दिन#तिथि
श्राद्ध एवं पितृ कर्म

मासिक श्राद्ध कैसे करें हर महीने

हर माह मृत्यु तिथि पर: तिल-जल तर्पण + ब्राह्मण/गरीब भोज + कौवा/कुत्ता/गाय भोजन + दान। 12 माह तक। न्यूनतम: तर्पण + गरीब भोज। 12 माह बाद → वार्षिक श्राद्ध।

#मासिक श्राद्ध#हर महीने#तिथि
अंत्येष्टि संस्कार

वार्षिक श्राद्ध की तिथि कैसे निर्धारित करें

मृत्यु की हिंदू तिथि (पंचांग अनुसार) = वार्षिक श्राद्ध तिथि। तिथि न याद हो → सर्वपितृ अमावस्या (पितृपक्ष अंतिम दिन) = सबके लिए मान्य। विधि: तिल-जल तर्पण + ब्राह्मण/गरीब भोज + दान + कौवा भोजन। हिंदू तिथि, अंग्रेजी तारीख नहीं।

#वार्षिक श्राद्ध#तिथि#पुण्यतिथि
श्राद्ध कर्म

श्राद्ध कर्म कौन कौन से दिन करने चाहिए

श्राद्ध तिथियाँ: (1) पितृपक्ष — 16 दिन, मृत्यु तिथि अनुसार। (2) वार्षिक — पुण्यतिथि पर। (3) प्रत्येक अमावस्या। (4) संक्रान्ति, ग्रहण, अक्षय तृतीया। (5) शुभ कार्यों से पूर्व नान्दीमुख श्राद्ध। तिथि अज्ञात हो तो सर्वपितृ अमावस्या पर। चतुर्दशी = अकाल मृत्यु वालों का।

#श्राद्ध#तिथि#पितृपक्ष
शिव पूजा

रुद्राभिषेक कब करना चाहिए?

रुद्राभिषेक कब: सर्वश्रेष्ठ — महाशिवरात्रि (4 प्रहर)। सावन सोमवार। प्रदोष (त्रयोदशी)। मास-शिवरात्रि (कृष्ण चतुर्दशी)। व्यक्तिगत: जन्मदिन, संतान-कामना, गृह-प्रवेश। नित्य: ब्रह्म मुहूर्त। वर्जित: सूतक, श्राद्ध-दिन, ग्रहण।

#रुद्राभिषेक#समय#तिथि
ध्यान साधना

ध्यान के लिए कौन सा समय सबसे शुभ होता है?

ध्यान के लिए सबसे शुभ समय ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से डेढ़ घंटे पहले) है — सात्विक ऊर्जा अधिकतम। पर्वों में एकादशी, पूर्णिमा, शिवरात्रि और नवरात्रि विशेष शुभ हैं। सूर्य-चंद्र ग्रहण में ध्यान का फल कई गुना माना जाता है।

#ध्यान#शुभ समय#ब्रह्ममुहूर्त
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