रामचरितमानस — बालकाण्डबारात अयोध्या से कब और कैसे चली?गुरु वसिष्ठजी की आज्ञा पर शुभ मुहूर्त में — 'सजहु बारात बजाइ निसाना।' हाथी-घोड़े-रथ सजाये, ब्राह्मण-मुनि-सेना साथ लिये। भव्य बारात अयोध्या से जनकपुर चली।#बालकाण्ड#बारात प्रस्थान#अयोध्या
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर में बारात का स्वागत कैसे हुआ?भव्य स्वागत — नगर सजा, तोरण-पताकाएँ। दशरथ-जनक का प्रेमपूर्ण मिलन। रामजी का विवाह-श्रृंगार — मोर-कण्ठ-सी कान्ति, पीताम्बर, विवाह आभूषण। सब मंगल सुहावने।#बालकाण्ड#बारात स्वागत#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डदशरथ ने दूतों से समाचार सुनकर क्या किया?अपार हर्ष — रनिवास बुलाकर जनक की पत्रिका सुनाई। सब रानियाँ हर्ष से भरीं — 'जैसे मोरनी बादलों की गर्ज सुनकर प्रफुल्लित।' बड़ी-बूढ़ी आशीर्वाद दे रहीं, माताएँ आनन्द में मग्न। बारात की तैयारी शुरू।#बालकाण्ड#दशरथ#समाचार
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा दशरथ ने श्रीरामजी को देने में क्या आपत्ति जताई?दशरथ का हृदय काँपा — 'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — सब पुत्र प्राण समान हैं, राम को देना सम्भव नहीं। कहाँ भयानक राक्षस और कहाँ मेरा सुकुमार किशोर पुत्र!#बालकाण्ड#दशरथ#पुत्र मोह
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वामित्रजी राजा दशरथ के पास क्यों आये?राक्षसों के समूह विश्वामित्रजी के यज्ञ में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने दशरथ से कहा — 'असुर समूह सतावहिं मोही' — राम-लक्ष्मण को दो, राक्षसों के वध से मैं सनाथ हो जाऊँगा।#बालकाण्ड#विश्वामित्र#दशरथ
रामचरितमानस — बालकाण्डभरत किसके पुत्र थे?भरतजी राजा दशरथ और रानी कैकेयी के पुत्र थे। श्रीरामजी के अनन्य भक्त — जिनका मन राम-चरणों में भौंरे की तरह सदा लगा रहता, कभी पास नहीं छोड़ता।#बालकाण्ड#भरत#कैकेयी
रामचरितमानस — बालकाण्डराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिये कौन सा यज्ञ करवाया?पुत्रेष्टि यज्ञ — गुरु वसिष्ठजी की सलाह पर श्रृंगी ऋषि से करवाया। यज्ञ अग्नि से दिव्य पायस प्रकट हुआ, तीनों रानियों में बाँटा, तीनों गर्भवती हुईं।#बालकाण्ड#पुत्रेष्टि यज्ञ#दशरथ
रामचरितमानस — बालकाण्डअयोध्या में कौन से राजा राज करते थे जब भगवान ने अवतार लिया?रघुकुलशिरोमणि राजा दशरथ — वेदों में विख्यात नाम, धर्मधुरन्धर, गुणनिधि, ज्ञानी, भगवान के भक्त।#बालकाण्ड#दशरथ#अयोध्या
रामायणराम जी का वनवास 14 साल क्यों था?कैकेयी ने देवासुर संग्राम में दशरथ की जान बचाने पर मिले दो वरदानों में 14 वर्ष का वनवास माँगा, ताकि राज्याधिकार नियम के अनुसार राम का अधिकार समाप्त हो। दूसरा कारण — उसी अवधि में रावण के जीवन के 14 वर्ष शेष थे और रावण-वध की दैवी योजना थी।#राम वनवास#कैकेयी वरदान#14 वर्ष