विस्तृत उत्तर
राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिये पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। गुरु वसिष्ठजी की सलाह पर श्रृंगी ऋषि ने यह यज्ञ सम्पन्न करवाया।
जब राजा दशरथ को ग्लानि हुई कि पुत्र नहीं है, तो वे गुरु वसिष्ठजी के घर गये — 'गुर गृह गयउ तुरत महिपाला। चरन लागि करि बिनय बिसाला॥' — चरणों में लगकर बड़ी विनय की। गुरु ने श्रृंगी ऋषि से पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। यज्ञ अग्नि से दिव्य पायस (खीर) प्रकट हुआ जिसे तीनों रानियों में बाँटा गया।





