विस्तृत उत्तर
अयोध्या में रघुकुलशिरोमणि राजा दशरथ राज करते थे।
चौपाई — 'अवधपुरीं रघुकुलमनि राऊ। बेद बिदित तेहि दसरथ नाऊँ। धरम धुरंधर गुननिधि ग्यानी। हृदयँ भगति मति सारँगपानी॥'
अर्थ — अवधपुरी में रघुकुलशिरोमणि दशरथ नामके राजा हुए, जिनका नाम वेदोंमें विख्यात है। वे धर्मधुरन्धर, गुणोंके भण्डार और ज्ञानी थे। उनके हृदयमें भगवान्की भक्ति थी।





