शिव पूजा विधिशिवलिंग की जलाधारी का मुख किस दिशा में होना चाहिए?जलाधारी का मुख सदैव उत्तर दिशा में (शिव पुराण, स्कन्द पुराण, वास्तु शास्त्र — तीनों एकमत)। वैकल्पिक: पूर्व दिशा। दक्षिण और पश्चिम सर्वथा वर्जित। उत्तर = कुबेर की दिशा, समृद्धि प्रवाह, सकारात्मक ऊर्जा। घर और मंदिर में नियम समान। जलाधारी कभी न लांघें।#जलाधारी#सोमसूत्र#दिशा
श्री विद्याश्री यंत्र को घर में कहाँ और कैसे स्थापित करें?ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), ऊंचे स्थान। ताम्रपत्र/रजत/स्फटिक। दीपावली/शुक्रवार। पंचामृत शुद्धि + श्री सूक्त + 108 जप। प्रतिदिन दीपक + 'ॐ श्रीं नमः' 11 बार। शयनकक्ष/शौचालय से दूर।
शिव पूजा विधिशिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय किस दिशा में मुख होना चाहिए?शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय मुख उत्तर दिशा की ओर रखें (शिवपुराण/स्कन्द पुराण)। बेलपत्र उल्टा (चिकनी सतह शिवलिंग की ओर) चढ़ाएं। त्रिदलीय अखंडित बेलपत्र, विषम संख्या (3/5/11/21) में, अनामिका-अंगूठे-मध्यमा से पकड़कर अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जपें।#बेलपत्र#शिवलिंग#दिशा
वास्तु शास्त्रवास्तु के हिसाब से रसोई में फ्रिज कहां रखेंफ्रिज दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में रखें, दरवाजा पूर्व दिशा में खुले। ईशान कोण और दक्षिण दिशा में बिल्कुल न रखें। दीवार से एक फीट दूर रखें।#वास्तु#फ्रिज#रसोई
तंत्र शास्त्रतंत्र में होम कुंड का आकार और दिशा क्या होनी चाहिए?आकार: वृत्त=शांति, चौकोर=सर्वकार्य (सामान्य गृहस्थ), त्रिकोण=मारण (वर्जित), अर्धचंद्र=वशीकरण, पद्म=मोक्ष। दिशा: कुंड मुख पूर्व, साधक पश्चिम (पूर्वमुखी)। गृह: 1×1 फुट। विशेष = विद्वान से।#होम कुंड#हवन#आकार
लक्ष्मी पूजालक्ष्मी जी की आरती में दीपक किस तरफ घुमाएं?दक्षिणावर्त (Clockwise) — बाईं→दाहिनी। दाहिने हाथ। चरण→ऊपर→मुख→चरण = पूर्ण चक्र। 3/7 बार। 'ॐ जय लक्ष्मी माता'। सभी को दिखाएं — शीर्ष स्पर्श।#आरती#दीपक#दिशा
वास्तु शास्त्रवास्तु अनुसार घर में फव्वारा कहां रखेंउत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में फव्वारा रखें। पानी का बहाव घर की ओर हो। दक्षिण, आग्नेय और नैऋत्य दिशा में न रखें। बेडरूम में फव्वारा न लगाएँ।#वास्तु#फव्वारा#वाटर फाउंटेन
मंत्र जप विधिमंत्र जप में दिग्बंधन क्या होता है और कैसे करें?6/10 दिशाएं 'lock' = सुरक्षा कवच। 'ॐ अस्त्राय फट्' + चुटकी (पूर्व→दक्षिण→पश्चिम→उत्तर→ऊर्ध्व→अधो)। अनुष्ठान = अनिवार्य। दैनिक = वैकल्पिक। बाधा निवारण + ऊर्जा संरक्षण।#दिग्बंधन#दिशा#रक्षा
गणेश पूजागणेश जी की मूर्ति घर में किस दिशा में रखनी चाहिए?ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)। मुख पूर्व/उत्तर। बाईं सूंड = गृहस्थ (सौम्य)। लक्ष्मी के बाईं ओर। प्रवेश द्वार = बाधा निवारक। शयनकक्ष में नहीं।#गणेश#मूर्ति#दिशा
मंदिर वास्तुमंदिर में नवग्रह की प्रतिमाएं किस क्रम में स्थापित होनी चाहिए?सूर्य = केंद्र। 8 ग्रह = 8 दिशा। 'मुख दूसरे ओर नहीं'। चंद्र=NE, मंगल=S, बुध=N, बृहस्पति=NE, शुक्र=E, शनि=W, राहु=SW, केतु=NW। ईशान में स्थापित।#नवग्रह#क्रम#स्थापना