विस्तृत उत्तर
गणेश प्रतिमा की दिशा:
सर्वोत्तम: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — सभी देवताओं हेतु सर्वोत्तम।
नियम
- ▸मुख पूर्व या उत्तर — भक्त पश्चिम/दक्षिण मुख।
- ▸सूंड दिशा: बाईं सूंड (वाम मुखी) = गृहस्थ हेतु सर्वोत्तम (सौम्य)। दाहिनी सूंड = सिद्ध गणपति (कठिन पूजा नियम)।
- ▸लक्ष्मी के बाईं ओर (दीपावली)।
- ▸प्रवेश द्वार पर = बाधा निवारक (मुख बाहर)।
- ▸शयनकक्ष में न रखें।





